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अर्थव्यवस्था को लगा तगड़ा झटका

पांच साल के निचले स्तर पर पहुंची जीडीपी

अपने देश में एक ऑफिस है. नाम है केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय. इसका काम है देश से जुड़े हुए आंकड़े जारी करना. देश की अर्थव्यवस्था कैसी है, देश में रोजगार कितना है, देश में कितनी खेती और उसकी उपज हो रही है, देश में कितनी कारें बन रही हैं और देश में किस चीज का कितना उत्पादन हो रहा है. ये सारे आंकड़े केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के जरिए मिल जाएंगे. अब इसी ऑफिस ने 31 मई को कुछ आंकड़े जारी किए हैं. इन आंकड़ों में वो आंकड़ा भी है, जो देश की अर्थव्यवस्था के बारे में है. और जो आंकड़ा सामने आया है, वो देश की हालत के लिए ठीक नहीं है, कम से कम नई सरकार के लिए तो बिल्कुल भी नहीं, क्योंकि आंकड़ा कह रहा है कि देश की जीडीपी घट गई है और ये घटकर पिछले पांच साल के सबसे निचले स्तर पर है.

क्या होती है जीडीपी?

जीडीपी मतलब ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट. शुद्ध हिंदी में कहें तो सकल घरेलू उत्पाद. इसकी गिनती हर तीन महीने में होती है. देखा जाता है कि देश का कुल उत्पादन पिछली तिमाही की तुलना में कितना कम या ज्यादा है. भारत में कृषि, उद्योग और सेवा तीन अहम हिस्से हैं, जिनके आधार पर जीडीपी तय की जाती है. इसके लिए देश में जितना भी एक आदमी खर्च करता है, कारोबार में जितने पैसे लगाता है और सरकार देश के अंदर जितने पैसे खर्च करती है उसे जोड़ दिया जाता है. इसके अला और कुल निर्यात (विदेश के लिए जो चीजें बेची गईं है) में से कुल आयात (विदेश से जो चीजें अपने देश के लिए मंगाई गई हैं) को घटा दिया जाता है. जो आंकड़ा सामने आता है, उसे भी ऊपर किए गए खर्च में जोड़ दिया जाता है. यही हमारे देश की जीडीपी है.

अभी तक क्या कह रहा है आंकड़ा?

आंकड़ा कह रहा है कि जनवरी-मार्च की तिमाही में जीडीपी की दर घटकर 5.8 फीसदी हो गई है. इसकी वजह ये है कि पिछले 9 महीने में देश में कृषि, उद्योग और मैनुफैक्चरिंग जैसे अहम सेक्टर में मंदी रही है और इसकी वजह से जीडीपी घट गई है. इसके अलावा एक और आंकड़ा सामने आया है. ये आंकड़ा विकास दर का है. वित्त वर्ष 2018-19 में विकास दर घटकर 6.8 फीसदी पहुंच गई, जो पिछले पांच साल में सबसे कम है. विकास दर पूरे साल की जीडीपी का औसत होता है. यानी कि जीडीपी हर तीन महीने में जारी होती है और विकास दर का आंकड़ा पूरे साल का होता है.

क्या था पिछला आंकड़ा?

2017-18 में जनवरी-मार्च में जीडीपी की ग्रोथ रेट 8.1 फीसदी रही थी. वहीं 2017-18 में देश की विकास दर 7.2 फीसदी थी. सरकार ने अनुमान लगाया था कि इस मार्च की तिमाही में जीडीपी दर 6.5 फीसदी और वित्तवर्ष 2019 में विकास दर 7.1 फीसदी रहेगी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. जीडीपी की दर घटकर 5.8 फीसदी रह गई और विकास दर घटकर 6.8 फीसदी रह गई है.

राजकोषीय घाटा भी बढ़ गया

देश की अर्थव्यवस्था में एक आंकड़ा होता है, जिसे राजकोषीय घाटा कहते हैं. सरकार अगर अपनी आमदनी से ज्यादा खर्च करती है तो उस अंतर को राजकोषीय घाटा कहते हैं. आंकड़े बताते हैं कि ये घाटा भी बढ़ गया है. बजट में कहा गया था कि देश का राजकोषीय घाटा 6.34 लाख करोड़ रुपये हो सकता है. लेकिन अब जब आंकड़े जारी हो गए हैं तो ये साफ है कि राजकोषीय घाटा 6.45 लाख करोड़ रुपये का है और ये भी तय आंकड़े से ज्यादा है. लेकिन अगर जीडीपी के लिहाज से बात करें तो घाटे में मामूली कमी आई है. 2018-19 में देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.39 फीसदी रहा, जबकि बजट में 3.40 फीसदी का अनुमान था. इस लिहाज से राजकोषीय घाटा कम हुआ है क्योंकि इस बार हमारी जीडीपी का आंकड़ा बड़ा हो गया है.