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चुनावी बांसुरी

भारत में चर्चे खूब है चुनाव के कहीं मतदाताओं ने मत का प्रयोग कर किस्मत मशीनों में बंद कर दिया तो कहीं प्रत्याशियो के चुनावी बांसुरी गली गली बज रही है. हर गली में चुनावी गुफ्तगू युवा मतदाता कर रहे हैं तो 13 बार मत का प्रयोग कर चुके बुजुर्ग।

हर और चुनावी शोर कहीं जोरदार नारा तो कही गाजा बाजा.

दो नारा तो आम है हमारा नेता कैसा हो तो फलना पार्टी जिंदाबाद, झंडा से पटा शहर टोपी से सजे पार्टी के कार्यकर्ता का सर.

पर्चा बटना भी शुरू हो गया है समझाना, बुझाना, रिझाना भी चालू है. रूठे मतदाता जो पिछले बार तारीफ करते नहीं थकते थे, अभी बुराई करते नजर आ रहे हैं और पिछली बार जिस ने प्रखर विरोध किया वह सरकारी लाभ लेकर अब तारीफों के पुल बांध रहा हैं. कोई प्रत्याशी इस समुदाय तो कोई प्रत्याशी उस समुदाय से मिलने जुलने मे लगा है, जाति का कार्ड धर्म का कार्ड खेलना भी शुरू हो गया. किसी ने स्टार प्रचारक को वो इंग्लिश में कहते हैं ना “लाइन अप” करने में लगा है मतदान का दिन कम होता जा रहा है और नेताजी निकल पड़े है क्षेत्रों का दौरा करने

मतदाताओं ने भी शायरी बना दिया है

नेताजी आएंगे, घर मेरा खटखटायेंगे

वोट मिले ना मिले, हाथ जरूर जुड़ते जाएंगे.

 

जबाव नेता जी भी देते है और कहते है

हम आएंगे आपके घर, आपका वोट जाए इधर या उधर

5 साल में आएंगे, आपको खूब अपनापन दिखाएंगे.

क्षेत्रों के दौरों में नेताजी के पीछे 18 साल से कम वाले स्टार प्रचारक भी खूब होते हैं, जिनका काम झंडा पकड़ना बाजा वालों के आगे नाचना यह मतदाता ना होकर भी नेता जी के मन को भा जाते हैं. नेताजी इनसे इतने खुश होते हैं इतने खुश होते हैं कि एक बार उन्हें चॉकलेट बाँटकर अगले 5 साल के लिए भूल जाते हैं. नेता जी को कहां याद रहता है इन्हीं बच्चे ने आपके पार्टी के झंडे को अपने स्तर से आसमान तक उठाया था, इन्हीं बच्चे ने आप के चुनावी प्रचार में अपने स्तर के अव्वल दर्जे का नाच बस्ती वालों और आप को दिखाया था,नेताजी के हाथ से चॉकलेट मिला और उस बच्चे की उम्मीद खत्म.

 

जैसे जैसे दिन सामने आता है एसी में बैठे प्रशासनिक अधिकारियों के माथे पर पसीना आना भी शुरू हो जाता है कितनी की संख्या में मतदान कर्मी चाहिए कितने की संख्या में जवान जो शांतिपूर्ण मतदान करवा पाए अधिकारियों को चिंतित करती है मतदान के दिन मुस्तैदी दिखाने वाले जवान पर गर्मी का 45 डिग्री वाला तापमान भी जैसे ठंड का 12 डिग्री प्रतीत होता है सुरक्षा के लिए जवानो का समर्पण का यह भाव हर एक मतदाता की नजर में जवानों को शक्तिशाली बनाता है.

  • अमित पाठक