Image

दीदी से मिलने के मूड में नहीं बंगाल के डॉक्टर, दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल अभी भी जारी है. दो जूनियर डॉक्टरों से मारपीट के बाद शुरू हुई हड़ताल का असर बंगाल से लेकर दिल्ली तक देखने को मिल रहा है. देश के 19 से ज्यादा राज्यों के डॉक्टरों ने हड़ताल का खुलकर समर्थन किया है. इस बीच दिल्ली AIIMS के रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल खत्म कर अपने काम पर वापस लौट आएं हैं, लेकिन उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मांगे पूरी करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.

इंडियन मेडिकल असोसिएशन (IMA) के प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मुलाकात की.

हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने कहा है कि वे शाम को राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बुलाए गए बैठक में शामिल नहीं होंगे.

सूत्रो की माने तो एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह मल्ही ने कहा है कि सभी रेजिडेंट डॉक्टर काम पर वापस आ गए हैं, लेकिन हम काले बैज, पट्टियाँ और हेलमेट पहनकर सांकेतिक विरोध जारी रखेंगे। अगर हालत बिगड़े तो हम 17 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे.

डॉक्टर्स असोसिएशन ने कहा है कि हम पश्चिम बंगाल सरकार को हड़ताल कर रहे डॉक्टरों की मांगों को पूरा करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे रहे हैं. अगर सरकार नाकाम रहती है तो हमें एम्स में अनिश्चितकालीन हड़ताल करने पर मजबूर होना पड़ेगा.

क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि कोलकाता के एनआरएस अस्पताल में बीते सोमवार एक मरीज की मौत के बाद उनके तीमारदारों ने डॉक्टरों से मारपीट की थी. इसमें कुछ डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बाद डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे. चार दिन से हड़ताल जारी है.

17 जून को देशव्यापी हड़ताल
पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों पर हुई हिंसा के विरोध में इंडियन मेडिकल असोसिएशन भी हड़ताली डॉक्टरों के समर्थन में आ गया है. दिल्ली मेडिकल असोसिएशन (DMA) और इंडियन मेडिकल असोसिएशन (IMA) ने देश के 19 राज्यों के डॉक्टरों ने एकसाथ मिलकर 17 जून को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है. एसोसिएशन ने बकायदा सरकार को पत्र लिखकर केंद्रीय अस्पताल सुरक्षा कानून बनाकर पूरे देश में लागू करने की मांग की है. साथ ही कहा कि यदि मांगे पूरी नहीं की जातीं तो सोमवार को देशव्यापी हड़ताल की जाएगी.

AIIMS रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की मांगें

– पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों पर राजनीतिक से प्रेरित हमले रोकने के लिए केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे.
– देश भर के अस्पतालों में एक समान सुरक्षा कोड लागू किया जाए और वार्डो में तीमारदारों को प्रवेश देने के लिए एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर) बनाया जाए.
-अस्पतालों में सुरक्षा गार्ड बढ़ाए जाएं, बंदूकधारी गार्ड भी तैनात किए जाएं.
-मेडिकल कॉलेजों के छात्रवास में सुरक्षा बढ़ाई जाए.
-सभी अस्पतालों में सीसीटीवी की सुविधा हो, खासतौर पर इमरजेंसी में.
– अस्पतालों में सुरक्षा के लिए हॉटलाइन अलार्म सिस्टम लगाया जाए.
– सुरक्षा की नियमित समय पर समीक्षा की जाए.

डॉक्टरों का इस्तीफा जारी
हिंसा के विरोध में अबतक सैकड़ों डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है. अकेले बंगाल में ही करीब 700 डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ दी है. कुछ राज्यों में काली पट्टी बांध तो कुछ में विरोध स्वरूप हेलमेट पहनकर डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. डॉक्टरों की हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है. कई राज्यों में ओपीडी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं.

दिल्ली में इन अस्पतालों में हड़ताल
दिल्ली में आज भी कई बड़े अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे. हड़ताल की वजह से आज भी मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. आज एम्स, सफदरजंग हॉस्पिटल, हिंदूराव हॉस्पिटल, बीएमएच दिल्ली, गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल, गुरु गोविंद सिंह हॉस्पिटल, बाबा साहब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज, नॉर्दन रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एंड एसोसिएटेड हॉस्पिटल्स, श्री दादा देव मातृ एवं शिशु चिकित्सालय, ईएसआईसी हॉस्पिटल  समेत अन्य हॉस्पिटल शामिल हैं.

सीएम के सामने रखीं छह शर्ते
हड़ताली डॉक्टरों को चेतावनी देने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखकर डॉक्टरों को मनाने की कोशिश की, मगर वे हड़ताल पर अडिग हैं. उन्होंने हड़ताल खत्म करने के लिए ममता बनर्जी के सामने माफी मांगने समेत छह शर्तें रखी हैं. इनमें ममता का एनआरएस अस्पताल आकर उनसे मिलना, हमले में जख्मी डॉक्टर परिबाह मुखर्जी को देखने जाना, एसएसकेएम अस्पताल में दिए गए बयान को वापस लेना एवं अस्पतालों में डॉक्टरोंकी पर्याप्त सुरक्षा का लिखित रूप से आश्वासन देना प्रमुख हैं. इसबीच राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मसले पर विचार-विमर्श करने के लिए शुक्रवार देर शाम राजभवन बुलाया.