Image

नहीं रहे हास्य व्यंग के रत्न प्रदीप चौबे

हिन्दी हास्य व्यंग के मशहूर रचनाकर अब हमारे बीच नहीं रहे. लगभग 70 वर्ष के प्रदीप चौबे देर रात कार्डियक अटैक के कारण इस दुनिया को अलविदा कह गए. हिन्दी कवि के साथ ही वे गजल के भी महीन पारखी थे. 26 अगस्त 1949 को जन्में प्रदीप चौबे के बिना हर हास्य महफिल अधूरी है. फिलहाल वे मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर मे अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे. उन्हे दिल की बीमारी के साथ ही गाल ब्लैडर का कैंसर भी था.

उन्होने हमेशा देश, काल, वातावरण और समाज को ध्यान में रखकर अपना हास्य अंदाज सबके सामने रखा और हास्य व्यंग के कवि के रूप मे लोगो की पहली पसंद बने. अपनी काल्पनिक शव यात्रा पर भी एक हास्य कविता  लिख चुके प्रदीप चौबे शुरू से ही मज़ाकिया और खुले स्वभाव वाले व्यक्ति नज़र आए हैं

उनकी सबसे प्रमुख रचनाओ मे “ रेलमपेल“ – भारतीय रेल की जनरल बोगी आपने भोगी की नहीं भोगी?, बाप का दूध, हर तरफ भ्रष्टाचार आदि शामिल है.