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बिहार के बाहर JDU की अलग राह

जनता दल यूनाइटेड के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की अध्‍यक्षता में रविवार को हुई राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया. इसके अनुसार जेडीयू झारखंड सहित चार राज्‍यों में अपने दम पर विधानसभा चुनाव लड़ेगा. पार्टी बिहार के बाहर अपना विस्‍तार करेगी. बैठक में नीतीश कुमार ने यह भी साफ कर दिया कि जेडीयू बिहार में राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में है और यहां विधानसभा चुनाव एनडीए में रहकर मजबूती के साथ रहेगा. बैठक के बाद भी महासचिव केसी त्‍यागी ने साफ कर दिया कि जेडीयू 2020 में बिहार में विधानसभा का चुनाव एनडीए के बैनर तले लड़ेगा. उन्‍होंने यह भी कहा कि पीके की कंपनी से पार्टी को कोई मतलब नहीं है.
बैठक में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीति बनाने  का फैसला कर विवादों में आए पार्टी के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष प्रशांत किशोर भी शामिल हुए. कयास लगाए जा रहे थे कि बैठक में प्रशांत किशोर इस विवाद पर अपना पक्ष रखेंगे. लेकिन उन्‍हें बोलने का मौका नहीं मिला. बैठक में राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्‍यों, विभिन्‍न प्रदेशों के अध्‍यक्षों व बिहार के विभिन्‍न जिलाध्‍यक्षों ने शिरकत की.

इन चार राज्यों में अकेले विधानसभा चुनाव में उतरेगा जेडीयू 

जेडीयू राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के पहले से यह माना जा रहा था कि पार्टी औपचारिक रूप से झारखंड में विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला कर सकती है. लेकिन मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने तीन अन्य राज्यों (हरियाणा ,दिल्ली और जम्मू कश्मीर) में भी अकेल चुनाव लड़ने का चौंकाने वाला बड़ा फैसला लिया है. बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ कि जेडीयू झारखंड, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू कश्मीर में अकेले अपने दम पर विधानसभा का चुनाव मैदान में उतरेगी. इनमें दो राज्यों- हरियाणा और झारखंड में भाजपा की सरकार है. जम्मू-कश्मीर में साझे में भाजपा की सरकार थी और नई दिल्ली में सरकार बनाने के लिए वह जी तोड़ कोशिश कर रही है. दिल्ली में जनवरी 2020 में, जबकि हरियाणा और झारखंड में इसी साल क्रमश: अक्टूबर और दिसम्बर में विधानसभा का चुनाव प्रस्तावित है.जम्मू-कश्मीर में हालत सुधरने के बाद किसी भी समय चुनाव कराए जा सकते हैं. फिलहाल, वहां राष्ट्रपति शासन है.

तो क्या जेडीयू को मिल जाएगा राष्‍ट्रीय दर्जा

जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इन चार राज्यों में चुनाव लडऩे का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ. दलील यह कि पार्टी को दो राज्यों में राज्य पार्टी की मान्यता मिली हुई है. दो और राज्यों में यह दर्जा मिल जाए तो चुनाव आयोग जेडीयू को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दे देगा.झारखंड के गठन के समय भाजपा की पहली सरकार जेडीयू की मदद से बनी थी.उस समय जेडीयू के आठ विधायक थे. दूसरे विस चुनाव में जेडीयू विधायकों की संख्या छह रह गई. बाद के विधानसभा चुनाव में उसका खाता नहीं खुला. इसलिए जेडीयू झारखंड में संभावना देख रहा है. 2014 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने आप की मदद की गरज से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा. उस समय भाजपा से उसका अलगाव चल रहा था. हालांकि दो साल पहले हुए दिल्ली नगर निगम के चुनाव में जेडीयू के उम्मीदवार खड़़े हुए. किसी सीट पर कामयाबी नहीं मिली. लेकिन, इसी बहाने दिल्ली के लोग जेडीयू के बारे में जान गए.दिल्ली विधानसभा चुनाव में जदयू इसलिए भी अपनी संभावना देख रहा है, क्योंकि 20 से अधिक सीटों पर बिहार मूल के मतदाता निर्णायक हैं. नगर निगम चुनाव से पहले जदयू ने अपने राष्ट्रीय महासचिव को दिल्ली इकाई का प्रभारी बनाया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कभी कई सभाएं की थी.

 बैठक में इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा 

मिली जानकारी के अनुसार जेडीयू की बैठक में मुख्य रूप से संगठन के मुद्दों पर विचार किया गया.लोकसभा चुनाव के बाद अब पार्टी की नजर अगले साल के बिहार विधानसभा चुनाव पर है. इसे लेकर संगठन के विस्तार और इसकी मजबूती पर जोर दिया गया. पार्टी का हाल ही 50 लाख नए सदस्य बनाने का फैसला इसी की एक कड़ी है.बताया जा रहा है कि बैठक में लोकसभा चुनाव परिणाम व केंद्रीय मंत्रिमंडल में सांकेतिक भागीदारी से इनकार के बाद की स्थिति पर भी चर्चा हुई.

 झारखंड चुनाव को लेकर हुआ बड़ा फैसला

बैठक में झारखंड विधानसभा के चुनाव को लेकर जेडीयू का बड़ा फैसला हुआ. तय किया गया कि पार्टी वहां अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेगी. मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था कि झारखंड में विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला राष्ट्रीय कार्यकारिणी करेगी.झारखंड से आने वाले नेताओं से इस पर राय ली जाएगी.
खास बात यह भी है कि जेडीयू बिहार के बाहर दूसरे राज्यों में अपनी अलग राजनीतिक गतिविधि चलाने कर राह पर है. अरुणाचल प्रदेश में हाल में हुए विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ 15 सीटों पर उम्‍मीदवार उतारे थे. इनमें से सात सीटों पर पार्टी को जीत मिली थी. अब जेडीयू ने झारखंड में विधानसभा चुनाव लडऩे का फैसला किया है. झारखंड में बीजेपी की सरकार है.

महत्‍वपूर्ण रही बैठक

 जेडीयू की आज की बैठक इस मायने में महत्‍वपूर्ण थी कि यह पार्टी के केंद्र सरकार में शामिल नहीं होने के फैसले के बाद की पहली बैठक थी. यह बैठक प्रशांत किशोर के ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीति बनाने के फैसले के बाद उठे विवाद के बाद हुई. बैठक के पहले नीतीश कुमार साफ कर चुके थे कि प्रशांत किशोर की एजेंसी से जेडीयू का कोई संबंध नहीं है. प्रशांत की एजेंसी किस राज्य में किस पार्टी के लिए चुनावी रणनीति बनाती है, इससे भी पार्टी को कोई मतलब नहीं है.लेकिन उन्‍होंने यह भी कहा था कि इस मामले में प्रशांत किशोर को जवाब देना होगा. माना जा रहा था कि बैठक में प्रशांत किशोर इस पर कुछ बोलेंगे, लेकिन उन्‍होंने कुछ नहीं कहा.

प्रशांत किशोर की एजेंसी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी को चुनावी सहयोग करने जा रही है. जबकि, वहां ममता का मुकाबला बीजेपी से है, जो एनडीए में जेडीयू के साथ है. बाद में केसी त्‍यागी ने पीसी में कहा कि पीके की कंपनी से जदयू को कोई मतलब नहीं है.जदयू चाहती है कि पश्चिम बंगाल में ममता की पार्टी की हार हो.