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सामाजिक धरातल पर आधारित हैं कहानी संग्रह “कवच”

कहानी अच्छी खराब लग सकती है, क्योंकि वह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है, लेकिन कहानी को कहानी लगना चाहिए और इस दृष्टिकोण से दिलबाग सिंह विर्क का कहानी संग्रह कवच पठनीय है . कवच में कुल इक्कीस कहानियां है, जो अपने लघु आकार के कारण चाय के कप के साथ-साथ समाप्त हो जाती हैं . इस संग्रह की कहानियों की प्रमुख विशेषता यह है कि ये काल्पनिक जगत से संबंधित न होकर सामाजिक धरातल पर आधारित हैं. लेखक की भाषा पर पकड़ है और भाषा और कथानक के दृष्टिकोण से सभी कहानियां सरल और सरस हैं . खूँटे से बंधे लोग, च्युइंगम, फिसलन आज के फेसबुक, व्हाट्स एप का दौर की कहानियाँ हैं, जिनमें से खूँटों से बंधे लोग मेरे आतिथ्य संपादन में प्रकाशित प्रभात खबर में प्रकाशित हुई और पाठकों को बेहद पसंद आई . सुहागरात भी एक सुंदर कहानी है, जो वेश्याओं के जीवन पर आधारित है. कवच एक व्यंग्य है, जिसे आप को खुद ही पढ़ना चाहिए.
संक्षेप में, इतना ही इतना ही कहा जा सकता है, कि इस संग्रह को पढ़कर आप निराश नहीं होंगे.

प्रियंका ओम
(लेखिका एवं समीक्षक)