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हॉन्गकॉन्ग में मच गया बवाल, चीन के कानून को लेकर

हॉन्गकॉन्ग में चीन के विवादास्पद प्रत्यर्पण बिल को लेकर मचा बवाल सोमवार को भी जारी है. बिल के खिलाफ हजारों लोग सड़क पर उतर आए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान ज्यादातर प्रदर्शनकारी सफेद रंग के कपड़े पहने और हाथों में पीले रंग का छाता लिए हुए नजर आए क्योंकि उन्होंने विरोध जताने के लिए सफेद रंग चुना है जबकि पीला रंग साल 2014 से लोकतंत्र के समर्थन का प्रतीक है, जिसे ‘अंब्रेला रिवोल्यूशन’ के नाम से जाना जाता है. बता दें कि यह विवादास्पद बिल संदिग्ध लोगों को चीन को प्रत्यर्पित करने की अनुमति दे सकता है. आयोजकों ने कहा कि रविवार, मार्च में एक लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया. समाचार एजेंसी एफे की रिपोर्ट के मुताबिक, विक्टोरिया पार्क में विरोध जता रहे प्रदर्शनकर्ता जमा रहे. यह कई घंटों तक भरा रहा. भीषण गर्मी के बावजूद सड़कों पर भारी भीड़ देखी गई. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रत्यर्पण बिल को भंग करने की मांग की.

रविवार दिन भर प्रदर्शन शांति पूर्ण रहा लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, ये हिंसक हो गया. यहां संसद के बाहर प्रदर्शन करने जा रहे लोगों को जैसे ही पुलिस ने जबरदस्ती खदेड़ना शुरू किया ठीक वैसे ही उन्होंने पुलिस पर बोतलें फेंकीं. इस पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया.

पुलिस की कार्रवाई पर प्रदर्शनकारी- ‘हमें विरोध करने का अधिकार है…’ ये बार बार चिल्लाते दिखे. हॉन्गकॉन्ग में रात भर झड़पें जारी रहीं.

प्रत्यर्पण बिल और उसका विरोध क्यों?

नए कानून को फरवरी में प्रस्तावित किया गया था और इस पर जुलाई में वोट होने की उम्मीद है. यह कानून हॉन्कॉन्ग के मुख्य कार्यकारी और अदालतों को उन देशों के प्रत्यर्पण अनुरोधों को प्रक्रिया में लाने की अनुमति देगा जिनके साथ पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश का औपचारिक हस्तांतरण समझौता नहीं है. इसमें चीन, ताइवान और मकाओ शामिल हैं, जिन्हें बिना विधायी पर्यवेक्षण के हस्तांतरण की इजाजत होगी. इस नियम के मुताबिक, स्थानीय अदालतें निजी तौर पर मामलों को देखेंगी और प्रत्यर्पण को रोकने के लिए वीटो शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती हैं. वहीं हॉन्गकॉन्ग के कार्यकारी का कहना कि इस विषय का मकसद कानूनी रिक्तता को कवर करना है.

बिल के खिलाफ विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि ये बिल कानून जाएगा जो अगले महीने हो सकता है. हॉन्गकॉन्ग अपनी स्वतंत्रता चीन को खो देगा और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकती है. वहीं, पीटर चान नाम के एक अन्य प्रदर्शनकारी ने न्यूज एसेंजी एएफपी से कहा, ‘सरकार प्रदर्शनकारियों की इस संख्या को नजरअंदाज नहीं कर सकती है. अगर वे वास्तव में हमारी मांगों का जवाब नहीं देना चाहते हैं तो हम और कार्रवाई से इनकार नहीं करेंगे.’