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आपका एक वोट भी क्यो है जरूरी?

इस समय भारत मे गर्मी के साथ-साथ लोकसभा चुनाव का भी मौसम चल रहा है और दोनों का ही तापमान हद से ज्यादा गरम है. जमशेदपुर की बात करे तो यहा के लोग 12 मई को इस त्योहार को मनाएंगे. कुछ लोगो मे अभी से ही 12 मई को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. मेरी तरह कुछ ऐसे भी लोग है जो इस बार पहली दफा वोट डालने के अनुभव को प्राप्त करेंगे. मगर दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी लोग है जिनहोने अभी से ही 12 मई को मिलने वाली छुट्टी का उपयोग किस प्रकार करना है इसका फैसला कर लिया है, यानि 12 मई को घूमने फिरने का प्लान किया गया है. बेशक उनकी अपनी इच्छा से ही वो काम करेंगे लेकिन अबकी बार जब आप घूमने जाए तो कृपया सड़क पर पड़े गड्ढो को देख या इस गर्मी के मौसम मे सड़क पर पानी की अव्यवस्था को देख कृपया सरकार को न कोसे बल्कि खुद को ही इसका जिम्मेदार माने.

खुद को क्यों? जी वो इसलिए क्यो की आपकी तरह और भी कुछ लोग है जो की बड़ी आसानी से सरकार पर सवाल तो खड़े करते है पर जब सही सरकार चुनने का मौका आता है तब अपने हाथ पीछे कर लेते है और अंत मे एक गलत पार्टी का चुनाव हमे इन परिस्थितियो का सामना करती है जो हमे सरकार को कोसने का मौका देती है. जब सिर्फ एक वोट के कारण कोई अच्छी पार्टी सत्ता से विमुख हो जाएगी तब आपको यह पछतावा ज़रूर होगा की काश मैंने भी वोट दिया होता तो शायद आज मेरी पसंदीदा पार्टी को यूं निराश न होना पड़ता. हमारे देश में औसतन 50% से 60% ही मतदान (Voting)  होती है. इसमें छोटी-बड़ी राजनैतिक पार्टियो व निर्दलीय उम्मीदवारों में वोट बंटते या पड़ते हैं. जिसको भी 10%-20% वोट पड़ जाते हैं वो जीत जाता है, अत: आज कल के नेता गलत छीजो का लालच देकर इन 10 से 20% लोगो को अपने प्रभाव से वोट करवा लेते हैं व चुनाव जीत जाते है जिस कारण ऐसे लोग चुन कर आते है जो पूर्णतया भ्रष्ट होते है व जिनका चुनाव (Election) जिंतने का एक मात्र उदेश्य सत्ता पाना और धन कमाना होता है, तथा चुनाव जिंतने के बाद वह अगले 5 वर्ष तक देश के संसाधनों का खूब लाभ उठाते है व खूब भ्रष्टाचार करते है.

अब आपका सवाल ये होगा की आपका एक वोट कैसे? अगर आपकी तरह और 10 लोग भी ऐसा सोच ले की मेरे एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा तो पूरे दस मतदान का फर्क पड़ेगा जो एक अच्छी पार्टी को हराने के लिए काफी है. अब यह पूर्ण रूप से आप पर निर्भर करता है की आपको एक स्वस्थ सरकार चाहिए या फिर भ्रष्ट राजनीति. आशा है मेरी तरह आपको भी एक जिम्मेदार और ईमानदार नेता की जरूरत है तो कृपया 12 मई को वोट डालने के बाद ही अपने परिवार के साथ छुट्टी का आनंद लेने जाए.

स्वाति तिवारी

संपादक