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FATF में ब्लैकलिस्ट होने का खतरा,पाकिस्तान के पास सिर्फ 6 दिन

जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तयब्बा जैसे आतंकी संगठनों पर एक्शन लेने में नाकाम रहा पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) द्वारा ब्लैकलिस्ट हो सकता है. आतंकी संगठनों पर समुचित कार्रवाई न करने के लिए पाकिस्तान को FATF ग्रे लिस्ट में पहले ही डाल चुका है. इसके बाद पाकिस्तान को जैश और लश्कर के खिलाफ कार्रवाई करने का वक्त दिया गया था और उसे 27 एक्शन प्लान बताए गए थे. इस मामले पर फैसले से पहले पाकिस्तान के पास अब सिर्फ छह दिन का वक्त बचा है.

FATF दुनिया भर में आतंकी संगठनों को दी जाने वाली वित्तीय मदद पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था है. एशिया-पैसिफिक ग्रुप ने पाकिस्तान को बताया है कि जिन 27 एक्शन प्लान पर उसे काम करने को कहा गया था उसमें से 18 पर उसका एक्शन संतोषजनक नहीं है. बता दें कि एशिया-पैसिफिक ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग, जनसंहार करने वाले हथियारों की खरीद के लिए होने वाली वित्तीय लेन-देन को रोकने वाली एक संस्था है. इस संस्था की रिपोर्ट के आधार पर FATF कार्रवाई करती है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक एशिया-पैसिफिक ग्रुप ने मांग की है कि पाकिस्तान ISIS,अल कायदा, जमात उद दावा, फलह ए इंसानियत फाउंडेशन, लश्कर -ए- तय्यबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क, और तालिबान से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए. इसके अलावा पाकिस्तान से कहा गया है कि उसकी जांच एजेंसियां मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए कुछ ऐसे कदम उठाएं जिसका असर साफ-साफ दिखे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सितंबर तक ऐसे कदम उठा ले, जब अंतिम फैसले लेने के लिए एफएटीएफ की बैठक होगी. बता दें कि एशिया पैसिफिक ग्रुप की मीटिंग पिछले महीने चीन के गुआंगझू में हुई थी. यहां पर पाकिस्तान ने FATF के निर्देशों के मुताबिक आतंकी संगठनों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी दी थी.  गुआंगझू में हुई इस बैठक में भारत के फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के डायरेक्टर जनरल भी मौजूद थे और वे बैठक की सहअध्यक्षता कर रहे थे. बता दें कि इस बैठक में उनकी मौजूदगी का पाकिस्तान ने विरोध किया था.

पाकिस्तान के पास 6 दिन का वक्त

बता दें कि एफएटीएफ की अगली बैठक ओरलैंडों में 16 से 21 जून के बीच होने वाली है, यहां पर पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है. इस बीच पाकिस्तान एक बार फिर से इस मीटिंग में अपने बचाव के लिए जबाब तैयार कर रहा है.

सूत्रों ने बताया कि एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में पहले से जा चुके पाकिस्तान को इस लिस्ट से बाहर होने के लिए FATF के 36 में से 15 सदस्यों का वोट चाहिए. जबकि ब्लैकलिस्ट होने रोकने के लिए कम से कम 3 सदस्यों का वोट चाहिए. ओरलैंडों में होने वाली बैठक में पाकिस्तान पर की जाने वाली कार्रवाई पर भले ही मुहर लग जाए, लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा पेरिस में अक्टूबर में होने वाली FATF की बैठक में की जाएगी. ये बैठक 18 से 23 अक्टूबर के बीच होने वाली है.

वर्ल्ड बैंक से लोन के लिए जरूरी है FATF का क्लियरेंस

बता दें कि अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस द्वारा पेश किए गए एक प्रस्ताव के बाद जून 2018 में पाकिस्तान के FATF के ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया था. अगर पाकिस्तान को FATF ब्लैकलिस्ट कर देता है तो पाकिस्तान पर इसके गहरे आर्थिक प्रभाव होंगे. इसके बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के कर्ज पर भी रोक लग सकती है. आईएमएफ ने कहा था कि पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ वास्तविक कदम उठाने चाहिए. इसका मतलब है कि अगर पाकिस्तान को IMF से लोन चाहिए तो उसे FATF से क्लियरेंस लेना जरूरी है.

पाकिस्तान का ब्लैकलिस्ट करवाना चाहता है भारत-कुरैशी

इस बीच पाकिस्तान ने आतंक पर अपनी नाकामी छिपाने के लिए एक बार फिर से भारत का सहारा लिया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि भारत हमेशा से पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाना चाहता है. उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान को FATF में ब्लैकलिस्ट करवाना चाहता है. कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान का दुश्मन साजिश रच रहा है.  OIC में भारत को मिले समर्थन से तिलमिलाए पाकिस्तान ने कहा कि भारत ने OIC में घुसपैठ करनी चाही, लेकिन उसे वहां कामयाबी नहीं मिली.