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रिज्यूम में शामिल करें ये बातें, बढ़ेगा शॉर्टलिस्ट होने का चांस

नई नौकरी तलाशने के लिए कई पेज का रिज़्यूम बनाने की जरूरत नहीं है। आप एक पेज के रिज़्यूम में ही अपनी योग्यता की जानकारी दे सकते हैं। देबाशीष चक्रवर्ती कुछ ऐसी टिप्स दे रहे हैं, जिनसे आपके बढ़िया रेज्यूमे बनाने में मदद मिलेगी।

हमारी जिंदगी में टेक्नॉलजी का दखल काफी बढ़ गया है। आज हर कोई सोशल मीडिया से जुड़ा है। वह दूसरों की प्रोफाइल देख सकता है। ऐसे में क्या अपनी योग्यता या हुनर की जानकारी देने के लिए रिज़्यूम की जरूरत है? हां, इसकी जरूरत है। कंपनी के इंटरनल और सिलेक्शन प्रोसेस में रिज़्यूम की काफी अहमियत होती है। आज भी जॉब ऑफर से पहले एचआर प्रोसेस में रिज़्यूम ही कैंडिडेट की योग्यता परखने का आधार होता है और यह बदलने नहीं जा रहा। हम बता रहे हैं कि कैसे एक पेज के रिज़्यूम से आप नौकरी देने वाले को प्रभावित कर सकते हैं:

एक पेज का रिज़्यूम ही क्यों? 
प्रफेशनल रिज़्यूम राइटर्स और अनुभवी रिक्रूटर्स इस पर सहमत हैं कि चाहे आप फ्रेशर हों या आपके पास 15 साल का एक्सपीरियंस हो, शॉर्टलिस्ट होने के लिए एक पेज का रिज़्यूम काफी होता है। आपका रिज़्यूम हायरिंग प्रोसेस में कई मैनेजर्स के पास ईमेल अटैचमेंट के जरिए भेजा जाता है। हर कोई ईमेल अटैचमेंट में दूसरे पेज पर जाने के बजाय पहला पेज पढ़ना पसंद करता है। इसलिए आपको ध्यान रखना है कि रिज़्यूम एक ही पेज का रहे। हालांकि, अगर आप आर्टिस्ट, डिजाइनर, ऐकडेमिक या रिसर्चर हैं तो लंबा पोर्टफोलियो भेजने की जरूरत होती है।

पहला लॉन्ग ड्राफ्ट 
पहले ड्राफ्ट में लंबा डॉक्युमेंट बनाने के लिए उसमें हरेक चीज की जानकारी देनी है। आप उसमें सारी स्किल और अनुभवों की जानकारी दीजिए। यह भी बताइए कि आप इस जॉब में उनका कैसे इस्तेमाल करेंगे। आप जिस नौकरी के लिए अप्लाई कर रहे हैं, सिर्फ उसी से जुड़े फैक्ट रिज़्यूम में रखें। बाकी चीजों को निकाल दें। अतिरिक्त जानकारियां लिंक्डइन प्रोफाइल का हिस्सा हो सकती हैं, जिन्हें रिक्रूटर बाद में देख सकते हैं।

ज्यादा से ज्यादा स्पेस बनाए रखें 
एक पेज का रिज़्यूम बनाते वक्त आपके सामने सीमित स्पेस की चुनौती होगी। रिज़्यूम ऐसा बनाएं, जिसे आसानी से पढ़ा जा सके। कम से कम 0.5 का पेज मार्जिन दें। इसमें मिनिमम फॉन्ट साइज 11 और कॉमन फॉन्ट जॉर्जिया या एरियल रखें। रिज़्यूम के सबसे ऊपर अपने नाम के साथ ईमेल और मोबाइल नंबर जरूर लिखें। लाइनों के बीच सही स्पेस और बुलेट पॉइंट्स बनाए रखें, जो कम से कम प्रत्येक लाइन को कवर करते हों। इससे कंटेंट और वाइट स्पेस के बीच संतुलन बना रहेगा। रिज़्यूम को अपने नाम के साथ पीडीएफ फाइल में ही सेव करें, जिससे सारे मानक पूरे हों और सर्चेबिलिटी सुनिश्चित हो सके।

आखिरी बात 
रिज़्यूम का प्रिंट आउट निकालें। ऊपर के एक तिहाई हिस्से को निकाल दें और फिर देखें कि यह रिक्रूटर्स को प्रभावित करने की क्षमता रखता है या नहीं। रिक्रूटर औसतन एक रेज्यूमे पर सिर्फ 6 सेकेंड्स ही खर्च करता है। इसका मतलब यह हुआ कि रिक्रूटर आपके रेज्यूमे का ऊपरी एक तिहाई हिस्सा ही पढ़ते हैं। सीमित स्पेस वाले रेज्यूमे में आपको सुधार जब तक जारी रखना है जब तक कि आप इससे संतुष्ट न हो जाएं। (साभार: नव भारत टाइम्ज़)